लेखन मेरा संसार

सोमवार, 15 अगस्त 2016

जश्न-ए-आज़ादी

जश्न-ए-आज़ादी
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खाते हैं,पीते हैं,आराम फ़रमाते हैं
कुछ इस तरह हम स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं
देर से जागना, 'छुट्टी वाला नाश्ता'
चाय पकोड़े नूडल पास्ता
दिन भर चरते, सोफे पर बोझ बढ़ाते हैं
जी हम तो ऐसे ही आज़ादी मनाते हैं
देशभक्ति की फिल्में, नये पुराने गाने
राष्ट्रपर्व की ये परिभाषा सब चैनल दिखाते हैं
ये बुद्धू और बक्से आज़ादी मनाते हैं
फूँक लाखों का पेट्रोल, बाइक रैली निकालते,
अंधाधुंध दौड़ते सड़कों पे शोर मचाते हैं
O please, हम independance day मनाते हैं
मॉल में न्यू मूवी, mac d में खाना
डेटिंग, शॉपिंग से शामें सजाते हैं
dont interfare, हम फ्रीडम मनाते हैं
चेहरों पे स्टिकर, हाथों में 2 लड्डू
प्लाटिक तिरंगे दोपहर से सड़कों पर पाते हैं
चुप रहिये, आज हम 15 अगस्त मनाते हैं
बाप की जागीर है, विरासत में मिली है
मनमर्ज़ी करने ही तो हम दुनिया में आते हैं,
Whats your problem? हम आज़ादी मनाते हैं
अच्छा....मना के क्या उखाड़ेंगे? कौन से झंडे गाड़ेंगे?
बीत गए साल कितने, अब क्यों रोते-गाते हैं?
तुम जवाब दो इन सब का, हम आज़ादी मनाते हैं
एक दिन रोटी खिला कर, कौन किसे अमर करेगा?
मरते हैं तो मरने दो, भूखे रोज़ ही बिलबिलाते हैं
देशभक्त हैं हम, आज़ादी मनाते हैं
भूखे नंगों की उम्मीद? O Shit, we are busy
टाइम नहीं है भाई, क्यों मुँह उठाये चले आते हैं
Please dont disrurb, हम आज़ादी मनाते हैं

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अपराजिता ग़ज़ल